watch sexy videos at nza-vids!
j
परषिका : रोहिणी कपर
म पठानकोट की रहन वाली ह और
सावली लकिन भर फल शरीर
की मालकिन ह। म एक अचछ खात पीत
परिवार की लडकी ह। मर पापा बहत
बड सरकारी अफसर ह। मरी मा एक
पढी -लिखी और फशनबल सतरी ह,
वही मर पापा बहत ही शरीफ और
इमानदार अफसर ह। मरा भाई विदश म
रहता ह।
मर भाई का एक दोसत था, जिसका एक
छोटा भाई था जिसका नाम राहल था।
राहल अपन भाई क साथ कई बार हमार
घर आया करता था। मझ राहल शर स
ही बहत पसनद था। धीर धीर
वो भी मझ पसनद करन लगा था। अब
वो अपन भाई क बिना भी हमार घर आन
लगा था। हम दोनो अकसर मोबाईल प
बात किया करत थ , अब हमारी बात
परमियो की तरह होन लगी थी।
वो हमार घर किसी ना किसी बहान स
आ ही जाता था। घर वाल उसक इस तरह
घर आन प शक भी नही करत थ।

इस तरह एक साल बीत गया और अब तक
मझ भी दोसती और पयार म फरक
पता चल गया था , मर मन म भी राहल
को लकर कई तरह क खयाल आन शर
हो गय थ। अब हम मोबाइल पर एक दसर
का चमबन आदि करन लग थ , इसी तरह
राहल न मिलन पर भी चमबन मागना शर
कर दिया लकिन म उस मना कर
दती थी।
लकिन म उसको इस तरह जयादा दिन
मना नही कर पाई और एक दिन वो मझ
पढान क बहान मर घर आया।
मरी मा अपन कमर म टी वी दख
रही थी , उस वकत उसन मझ अचानक
कनधो स पकड लिया और मझ चममा दन क
लिय कहन लगा। इस बार म
उसको मना नही कर पाई और उसन मा क
आ जान क डर स मझ धीर स एक बार चम
कर छोड दिया। कछ ही दर बाद
वो वापिस अपन घर चला गया।

उस रात म बसबरी स उसक फोन
का इनतजार कर रही थी कि गयारह बज
क करीब उसका फोन आया। म बहत खश
थी।
उसन मझ पछा- तमह चमबन म मजा आया?
तो मन अपन दिल का हाल उस
बता दिया।
उस दिन उसन मर साथ फोन सकस
भी किया। मरी हालत बहत खराब
हो चकी थी , मरा दिल चाह
रहा था कि राहल अभी आ जाय और मझ
अपनी बाहो म भर क वो सब कछ कर
डाल जो फोन प कह रहा था।
अब हम मिलत तो चमबन तो आम
हो गया था अब राहल बझिझक मर शरीर
पर जहा चाहता हाथ फरता था। हमन
घर स बाहर रसटोरनट म भी मिलना शर
कर दिया था। वहा राहल बझिझक मज क
नीच मरी सकरट क अनदर मरी जाघो पर
हाथ फरता था कभी मौका पा क शरट क
उपर स ही मर

सतनो को सहला दता था । य सब मझ
बहत अचछा लगता था। घर प म अपन
भया का कमपयटर ही परयोग
करती थी जिस म म कई बार बल -फिलम
दखा करती थी। अब मझ इस
सबकी अचछी तरह समझ आ चकी थी। म
मन ही मन ना जान कितनी बार राहल
क साथ समभोगग कर चकी थी। इस बीच
मर पापा का तबादला कही और
हो गया लकिन मरी पढाई की वजह स
मझ और मरी मा को पठानकोट म
ही रकना पडा।
इसी बीच एक बार हमारा एसी खराब
हो गया और पापा न जहा स
एसी लिया था वहा फोन स शिकायत
लिखवा दी। उस दिन रविवार था और
वो शोरम बनद था इसलिए शोरम क
मालिक जो हमार घर क पास ही रहत थ
का बटा खद एसी चक करन हमार घर आ
गया। उनक परिवार स हमार बहत अचछ
पारिवारिक समबध थ , अकसर हमार घर
आत जात रहत थ। उनका नाम रोहण था,
म उनको रोहण भया कहती थी।

वो करीब 27-28 साल क होग।
उनहोन थोडी ही दर म एसी ठीक कर
दिया। मा न उनह कोलड डरिक वगरह
पिलाई और कछ दर बात करन क बाद
वो चल गय। लकिन इसक बाद
उनका हमार घर आना जाना बढ गया।
अकसर मा उनस फोन प बात
करती रहती थी जो मझ
अचछा नही लगता था। हम शनिवार और
रविवार को पापा क पास चल
जाया करत थ या पापा यहा आ
जाया करत थ और घर की चाबिया रोहण
भया क पास ही रहती थी ,
दसरी चाबी हमार पास होती थी।
एक बार मा किटटी-पारटी प
जा रही थी। जब
मा जा रही थी तो रोहण
भया भी बाहर खड थ , मा न उनह
मरा धयान रखन को बोला और चली गई।
मा क घर स बाहर जात ही मन राहल
को फोन कर दिया तो राहल न घर प
मिलन की जिद करनी शर कर दी , मन
तो मरा भी बहत कर रहा था राहल
को अकल म मिलन का , मन मा को फोन
करक अपनी सहली क घर जान का पछा,
मा न कह दिया कि म 3-4 घट म
वापिस आ जाउगी उसस पहल वापिस आ
जाना। मन राहल को फोन किया और घर
बला लिया। म भी बहत खश थी कि आज
राहल क साथ जो अपन सपनो म होत
दखा था आज हकीकत म उसका मजा लगी।

इसी बीच राहल आ गया। राहल
को अनदर बला कर मन जलदी स बाहर
वाल दरवाज को लॉक कर लिया। मन उस
समय आसमानी रग की सकरट और सफद रग
का टोप पहना हआ था। राहल न मझ
वही स अपनी बाहो म उठा लिया और
बडरम म ल गया।
वो कछ जयादा ही जलदी म लग
रहा था। मन उस कहा - मा न 3-4 घट
बाद वापिस आना ह, पहल कछ
खा पी तो लो !
लकिन वो कहन लगा- एक शिफट हो जाय
उसक बाद दखग खाना पीना।
कछ ही पलो म म सिरफ बरा और पटी म
थी। उस समय म 30 नमबर
की बरा पहनती थी जोकि उमर क
हिसाब स कही बडा था। अब म
भी आपा खो चकी थी मन जलदी स राहल
की टी -शरट उतार दी और उसकी पट
की जिप खोलन लगी, उसन
मरी बरा की हक खोल दी और मर
मममो को बाहर निकाल क चसना शर कर
दिया। मन भी राहल का लणड बाहर
निकाल क उसको हाथो स सहलना शर कर
दिया।

अब राहल क हाथ भी चल रह थ, वो मह
स मर मममो को चस रहा था और
हाथो स मरी पनटी उतार रहा था। म
राहल क सामन बिलकल नगी थी , राहल
मर ममम चसता हआ अपनी एक
उगली को धीर धीर मरी फददी (चत) म
घसान की कोशिश कर रहा था,
उसकी इस कोशिश की वजह स म आप स
बाहर हो गई और राहल को अपना लणड
मरी फददी (चत) म डालन को कहन
लगी।
राहल न भी मौक की नजाकत
को समझा और मझ बड प पीठ क बल लट
जान को बोला , मन वसा ही किया।
अब राहल मरी दोनो टागो क बीच म
था , उसन कहा-
अपनी दोनो टागो को फलाओ !
मन वसा ही किया, राहल न
मरी टागो को उठा क अपन कनधो पर
रख लिया और धीर स अपना लणड
मरी फददी प रख दिया , यह मरी और
राहल दोनो की ही पहली चदाई थी।
राहल न अपना लणड मरी फददी प रख क
दबाव बढाना शर किया। लणड
थोडा सा अनदर गया और फिसल कर
बाहर आ गया , इस तरह एक दो बार हआ
तो राहल खद प कनटरोल नही कर
पाया और इतन म ही सखलित हो गया।

इतन म दरवाज पर आहट हई और कोई
अनदर आया। हम दोनो क होश उड गय,
वो और कोई नही रोहण भया थ। राहल
उठ कर भागन लगा तो भया न
उसको पकड लिया। हमन भया स बहत
मिननत की लकिन भया न राहल
को उसी बडरम म बनद कर दिया और मझ
खीच कर दसर कमर म ल गय।
मन सोचा- कसी मसीबत म फनस गय ?
किया भी कछ नही और पकड भी गय !
लकिन भया का मड कछ और ही था।
या फिर मरा नगा जिसम दख क उनक
होश उड गय थ।
उनहोन मझ सीधा ही बोल दिया- अगर
तम बदनामी और अपनी मा स
बचना चाहती हो तो तमह मझस
चदना होगा।
मर पास और कोई चारा भी नही था और
वस भी म अभी चदी कहा थी लणड
का सवाद चखन स पहल ही पकडी गई
थी। रोहण की बात म मान गई। लकिन
मन रोहण भया को पहल राहल को छोडन
क लिय बोला। भया मान गय लकिन
उनहोन पहल मझ इसी हालत म
फोटो खिचवान क लिय बोला ताकि म
अपनी बात स मकर ना जाऊ ! लकिन म
तो खद ही तयार थी इसलिय म झट स
मान गई।

भया न जलदी स अपना मोबाईल
निकाला और मर नगन शरीर की 6-7
तसवीर खीची और मझ कपड पहनन
को बोल दिया और राहल
को डरा धमका कर घर स भगा दिया।
राहल क जान क बाद म झट स किचन म
गई और रोहण भया क लिय फरिज स
कोलड डरिनक ल आई। भया न एक
दो घनट ही कोलड डरिनक पी और मझ
बडरम म आन का इशारा करक मर आग आग
चल पड। बडरम म पहचत ही उनहोन मझ
अपनी बाहो म उठा कर बड प
लिटा दिया।
भया न जलदी स बिना वकत गवाए मर
कपड उतारन शर कर दिय , दखत ही दखत
एक मिनट स भी पहल म भया क सामन
नगन लटी हई थी।
अब भया मर सामन खद क भी कपड
निकालन लग , भया सिरफ अनडरवियर म
मर सामन खड थ, अनडरवियर म स
उनका लणड थोडा उभरा हआ सा नजर आ
रहा था। लकिन भया न
अपना अनडरवियर भी निकाल दिया और
हम दोनो अब निरवसतर थ।
भया का लणड दख क मर तो होश ही उड
गय , रोहण भया का लणड मर अनमान स
बहत जयादा बडा था।

भया न कहा- तम सिरफ मरी वजह स
चदना चाहती हो या मजा लना चाहती
हो ?
मन बझिझक बोल दिया- म
मजा लना चाहती ह।
तो भया की आखो म अजीब सी खशी नजर
आई मझ। म बड पर बठी थी और रोहण
भया मर सामन खड थ। रोहण न कहा -
मरा लणड अपन मह म ल लो और
इसको लॉलीपॉप की तरह चसो !
म वसा ही करन लगी। तीन चार मिनट
तक य ही म उनका लणड चसती रही ,
रोहण भया का लगभग नौ इच का लणड
अपन पर आकार म तन गया था , जिसस मझ
लणड को परा मह म लन म
परशानी हो रही थी। तभी भया न
अपना लणड मर मह म स बाहर निकाल
लिया। अब भया न मर मममो को अपन
हाथो म सभाल लिया , व उनह बड पयार
स सहलान लग वह कभी मर
सतनो को तो कभी गहर गलाबी रग क
चचको को चटकियो स मसल रह थ। मझ
इस सब म बहत मजा आ रहा था। भया न
ममम चसत चसत अपनी एक उगली को धीर
धीर मरी फददी म घसा दिया। म अब
आपा खो चकी थी, रोहण भया अब
अपनी जीभ स मरी फददी चाटन लग थ,
मर शरीर म बिजलिया दौडन लगी थी,
म कामक सवर म बोली- रोहण ! अब दर
मत करो पलीज…

इतना सनत ही भया न मरी फददी म ढर
सारा थक लगाया और अपन मोट लणड क
मह को मरी फददी क मह पर रख कर
धकका मारा , मझ बहत दरद महसस हआ
लकिन कवारी फददी होन क कारण
रोहण का लणड भी राहल की तरह फिसल
जान क कारण जयादा दरद
नही सहना पडा। पर रोहण
भया तो पकक शिकारी थ , उनहोन मर
होठो पर अपन होठ रख दिए और अपन
हाथो स मरी जाघो को थोडा और
फला दिया और लिग -मड को फिर स
फसा कर दोबारा कोशिश करन लग।
भया न इस बार हलका सा धकका दिया,
लिग-मड मरी फददी को लगभग फाडत
हए अनदर घस गया। दरद क मार
मरी चीख निकल गई … .. आ ई ई ई ऊई
मा मर गई म तो …. पलीज….
निकालो इस …

म इतना ही कह पाई थी कि रोहण न
थोडा पीछ हट कर एक धकका और
मारा !
म बरी तरह चीखी- उफ ….. आई…
मा पलीज …भया पलीज ओह….
और दरद क मार म आग कछ नही कह पाई
और अपन सिर को बड स सटा लिया ,
मरी आखो म पानी आ गया था।
भया न कहा- बस एक दो इच बचा ह……
अगर कहो तो डाल द ?
मन कहा- …अब इतना दरद नही ह…..
भया …अगर एक दो इच ही रह गया ह
तो डाल दो …… म झल लगी … . ।
लकिन भया झठ बोल रह थ, लणड
अभी आधा बाहर ही था। भया न लणड
को दो तीन इच पीछ खीच कर एक जोर
का धकका मारा , मरा मह बड पर
घिसटता हआ सा आग सरक गया, मझ
लगा जस किसी न कोई तज तलवार
मरी फददी म घसा दी हो , मर हलक स
मरमातक चीख निकली, मरा हाथ
मरी फददी पर पहच गया, हाथ चिपचिप
स दरवय स सन गया। मन हाथ को आखो क
सामन ला कर दखा तो और डर गई ,
अगलिया खन स लाल थी,

उफ…..मरी फददी तो जखमी हो गई….
अब कया होगा…….उफ निकालिए
इस….. म रोती हई कह रही थी, भया म
मर जाउगी।
भया न मर ममम मसलत हए कहा- यह
तो थोडी सी बलीडिग योनि-पट फटन
स होती ह ….. अब तमह सिरफ
मजा ही मजा आएगा।
उनकी बात सच ही थी- धीर धीर
मरा दरद आनद म बदलन लगा था।
भया अब थोडा जलदी जलदी अपन लब
लणड को अनदर -बाहर करन लग। म
बरी तरह कापन लगी थी, मर मह स
कामक आवाज फट रही थी। अब मझ बहत
मजा आन लगा था। मन कहा - भया !
जरा जोर-जोर स कीजिय !
उफ….उफ… ! म टट शबदो म बोली।
भया न रफतार बढा दी,
मरी सिसकारिया और भी कामक हो गई,
वो जस निरदयी हो गए थ, फच फच
की आवाज सार कमर म गज रही थी,
उततजना म मन भया की पीठ
को नोचना शर कर दिया था , उसन मर
सतनो को और मर लबो को चसना शर कर
दिया। म हच .. हच. की आवाजो क साथ
बिसतर पर रगड खा रही थी। रोहण
भया अपन पर जोश म थ , वह मर
मममो को सहलात तो कभी मर चचक
को मसलत हए आग पीछ हो रह थ।
अब उनकी गति म और तजी आ गई, म
दातो तल होठो को दबाय उनक लिग
दवारा परापत आनद क सागर म हिलोर
ल रही थी। अब भया चितत लट गए और
मझ अपन लणड पर बिठा लिया म सवय
ऊपर नीच होन लगी , एसी चाल होन क
बावजद हम दोनो को पसीना आ
गया था। अचानक भया का तवर
बदला और उनहोन बठ कर मझ फिर पीठ
क बल लिटा दिया और मरी फददी म
अपना लणड डाल कर जोर जोर स धकक
मारन लग। म अपन चरम पर आ चकी थी ,
अचानक उनहोन अपना लिग
मरी योनि स निकाल लिया और मर मह
म डालकर जोर जोर स धकक मार और
फिर मर सर को थाम कर ढर स होत चल
गए , वह मर मख म ही सखलित हो गए।

मन उनक लिग को छोडा नही बलकि उस
चस चस कर दोबारा उततजित करन
लगी। रोहण भया न मर मममो स
खलना शर कर दिया और बोल - कयो ?
कसा रहा…..?
बहत मजा आया भया ! …. लकिन
मरी फददी तो जस सनन हो गई ह …..
मन उनकी पीठ को सहलात हए कहा।
यह सननपन तो खतम
हो जायगा थोडी दर म, पहली बार म
तो थोडा कषट उठाना ही पडता ह, अब
तम अगली बार
दखना इतनी परशानी नही होगी बलकि
सिरफ मजा आएगा , भया न मर सतन
को चसत हए कहा।
उफ भया…….इनह आप चसत ह
तो कसी घटिया सी बजती ह मर शरीर
म ! ….. पलीज भया चसिय इनह !
………. म कामक तरग म खलती हई
बोली।
अचछा लो ! कह कर रोहण भया मर गहर
गलाबी रग क
निपपलो को बारी बारी चसन लग, म
आनदित होन लगी।
मन भया स पछा- आपन पहल
किसी को चोदा ह ?
हा चोदा ह । लकिन इसस पहल मन 20
साल स कम उमर
की किसी लडकी को कभी नही चोदा।
उस दिन मा क आन स पहल भया न मझ एक
बार और चोदा। इस चदाई क एक सपताह
तक मझ पशाब करत वकत पशाब
वाली जगह प बहत जलन होती रही। अब
यह सिलसिला लगातार चल रहा ह।